Kehte Suna Hai!

कहते है हर किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता,
किसी को ज़मीन तो किसी को आसमान नहीं मिलता!

ज़िन्दगी का ये सफर बस चलता रहता है,

किसी के जाने से नहीं रुकता

या किसी के आने से नहीं बदलता!

दिल धड़कता रहता है और साँसें चलती रहती है

मौत आने से पहले ये कारवाँ नहीं रुकता!

रिश्तों के मांझी अक्सर खो जाने की दुहाई देते है,

ज़िन्दगी के सागर में हर रिश्ता किनारा नहीं लगता!

पलटते जाते है सफर में सफहे

यादों की स्याही से फैलते जाते है,

कोई गुज़रा हुआ पल फिर से नहीं लिखता!

वक़्त अपनी गति से चलता जाता है,

किसी के ठहर जाने से वक़्त नहीं ठहरता!

जो खो गया वो खो गया,

ढूंढने पर वो इंसान फिर नहीं मिलता!

कहते सुना है मैने लोगों को,

ज़िन्दगी में चाहतों को हमेशा ज़रिया नहीं मिलता!


~ Sahil
(4th January, 2017)


Advertisements

Two silent moments!

एक बेपनाह खामोशी
एक गहरा सूनापन
एक लम्बी सी तन्हाई थी
दो लम्हों के दरमियाँ,
कहने को बहुत कुछ था
मगर लफ़्ज़ों में साँसें भर आई थी!

आहें निकलती रही
आंसू टपकते रहे
आवाज़ का अंदाज़ भी बदल चुका था,
दोनों को एहसास था 
फिर भी अजनबी सा हर एक अलफ़ाज़ था,
वाकिफ थे एक दूसरे की हर आहट से
फिर भी लबों पर झूठा इत्तेफ़ाक़ था!

कई बातें अब राज़ बन चुकी थी
सिलसिलों की रातें अब ख़्वाब बन चुकी थी,
गुज़रते वक़्त की दहलीज़ पर
जाने कितनी मरतबा ये धड़कन साथ छोड़ चुकी थी,
उस एक सन्नाटे में उम्र भर की हार मिली थी
लफ़्ज़ों की बंदिश में ज़िन्दगी बिछड़ रही थी,
बेबसी का आलम था दो लम्हों की जुस्तजू में
मीलों के फासलों में भी इनको कोई आह चुभी थी!

एक बेपनाह खामोशी
एक गहरा सूनापन
एक लम्बी सी तन्हाई थी
दो लम्हों के दरमियाँ,
एक दूसरे का आइना थे जो कभी
आज अजनबी सी लगती परछाई थी!


~ साहिल
(15th January, 2017)

Dosti ka Rishta

Rishton ke daayre se badhkar hota hai…
Dosti ka rishta!
Ye logon ke bich bikharta nahi
Aur bhi nikharta chala jaata hai,
Ye patjhad me toot kar girta nahi
Saawan ki baarish me sabko bheega jaata hai,
Ajnabi kaafile ka jaana pehchaana farishta hai ye
Dosti ka rishta!

Ehsaason ke daaman me palta hai
Dilon ki gehraaiyon me panapta hai,
Jo palkon ki chilman me hansi rakh kar
Katron ki dastaan badalta hai,
Jo dur rehkar dooriyon me bhi
Nazdeekiyon si aashna karta hai,
Jo aahista-aahista zindagi ki raahon me
Zindagi ka saar likhta hai,
Duniya me sabse khoobsurat ye
Dosti ka rishta!

Hatheliyon ki lakeeron se gehra
Taqdeeron ke daayre se uncha,
Khoon ka haq chalta nahi iss par
Ye seedha dil se dil ki sunta hai,
Rishton ke daayre se badhkar..
Anmol sa ek aaina ye…
Dosti ka rishta!

~ Sahil
(2nd March, 2017)

Dil Karta Hai 💕

दिल करता है बस देखता ही रहूँ
इस चेहरे की रौनक को आँखों के प्यालों में भरता रहूँ!

इन निगाहों पर शर्म से झुकती पलकें
और बालों का हलके से गालों को चूमना,
कुछ करवटें लेती लकीरों का
इन नर्म होठों पर आ कर ठहरना,
दिल का धड़कना ज़ोरों से
और अंदर ही अंदर एक गहरी आह भरना,
काँधे पर लटकते पल्लू से
हया का घूंघट ओढ़ लेना,
और रात के मैखानों में
खूबसूरती का जाम पी लेना,
सब कुछ कितना हसीन सा लगता है
जैसे कोई अप्सरा का रूप हो तुम!

दिल करता है बस देखता रहूँ
और अपनी नज़्मों में तुम्हारा श्रृंगार करता रहूँ!
दिल करता है बस देखता रहूँ
और…
बस देखता ही रहूँ 🙂

~ Sahil 😍
(17th Feb, 2017)

Wajood

तुम चहरे पर उतरती हो आफताब की रोशनी बन कर,
हर सहर मेरी बाहों में अंगड़ाइयाँ भर जाती हो।

तुम फ़िज़ाओं में बहती हो सरगोशी का लिबास ओढ़े,
मेरी साँसों को अपनी महक का घूँट पिला जाती हो।

तुम खेलती रहती हो लहरों की करवटों में उलझकर,
साहिलों पर रेत की नमी बन ज़िन्दगी के अनेक राज़ बहा ले जाती हो।

तुम बैठ जाती हो यादों के गलियारों में हर शाम,
बेवजह इन लबों पर एक रूहानी हँसी छोड़ जाती हो।

तुम रात के आगोश में ओझल हो जाती हो नज़रों की धुंध में सिमट कर,
अप्सरा बन मेरे सपनों में घर कर जाती हो।

तुम जो दिल खोल कर मुस्कुरा लेती हो ज़िन्दगी की बाहों में,
शायद तुम्हें पता नहीं, तुम मुझे जीने का वजूद दे जाती हो।

~ Sahil 💝
(23rd Feb, 2017)

Khaamosh Lafzon Ki Kahaani!

बहुत कुछ बदल जाता है
जैसे जैसे उम्र छोटी होती जाती है,
और ज़िन्दगी बड़ी!

लगता है जैसे अभी तो ज़िन्दगी की ऊँगली पकड़कर चलना सीखा था,
जैसे अभी तो ज़िन्दगी का दामन थाम कर सम्भलना सीखा था!
ख़्वाबों के पंख अभी लगने ही थे
और जीवन में क्यारियां अभी खिलने को थी,
बहुत कुछ सीखने को अभी बाक़ी था
और खुद से मिलने को ज़िन्दगी तत्पर थी!

पर ये सफ़र यूँ चला है
कि मंज़िल का पता नहीं, राहें तन्हा है!
लगता है कि जैसे
सब कुछ बस एक सपना है!
बस सब कुछ सिर्फ एक याद बन कर रह गया है
कि जैसे कोई पुराने ज़माने का भटका हुआ लम्हा है!

सच बहुत कुछ बदल जाता है
जैसे जैसे उम्र छोटी होती जाती है
और ज़िन्दगी बड़ी!
बातें गीत बन जाती है,
मुलाक़ातें कहानियां बन जाती है,
वो मामूल जिससे ज़िन्दगी सजती थी
अब याद बन रह जाता है!
इरादें अब अधूरी सी नज़्म बन जाते है,
नज़दीकियां अब कविताओं में रह जाती है,
और ऐसा बहुत कुछ जो लफ़्ज़ों में नहीं समा पाता,
वो सारी ज़िन्दगानी खामोश लफ़्ज़ों की कहानी बन जाती है!

– साहिल
30 January, 2017

Fir Wohi Baat

ये ज़िन्दगी भी अब
मौसम के जैसी लगती है!

ऑफिस की खिड़की से 
कब सुबह शाम में तब्दील हो जाती है,
और कब धूप तन्हा मायूस ही ढल जाती है
पता ही नहीं चलता!

शाम की ठंडी हवायें,
और आसमान से गिरती हल्की-हल्की बूँदें
इस बदन को सुस्ताने लगती है!

रात में ये आकाश बिलखने लगता है
ज़ोर ज़ोर से शोर कर चमकता है,
गुज़रे पलों की यादों में
ये आँखें और हसरतें,
रोते-रोते कब ख़्वाबों में गुम हो जाती है
पता ही नहीं चलता!

अचानक आँख खुलती है 
तो सुबह होती है,
फिर क्या…
मौसम की तरह ज़िन्दगी में भी
फिर वही बात होती है!!!

– Sahil
(26th September, 2016)

Ek Dost Tere Jaisa

Ek dost tere jaisa sabka hona chahiye!
Jo khali pade iss banzar dil ko jeena sikhaaye,
Jo chehre par muskuraahat ke khubsoorat rang sajae,
Jo suni padi in aankhon me jhaank kar inka haal bataye,
Ek dost tere jaisa sabka hona chahiye!!!

Ghanto gappe ladaye jis se, aur fir use hi kamina bulaye,
Jo meri har cheez par haq se apna adhikaar jataye,
Jo pani me fenk kar muje, bachaane ko khud bhi kud jaaye,
Ek dost tere jaisa sabka hona chahiye!!!

Jo dur hokar bhi paas hone ka ehsaas dilaaye,
Jise mere har kadam ka mujse pehle andaaza hojaye,
Jiske saath hum zindagi ka koi bhi raaz kehne se na katraaye,
Ek dost tere jaisa sabka hona chahiye!!!

Jo hamari galtiyon par hume sahi raah dikhaye,
Khuda bhi agar chaahe toh use humse cheen na paaye,
Zindagi me jo zindagi hone ka zariya ban jaye,
Sach me, ek dost tere jaisa sabka hona chahiye!!!


~ Sahil
(6th July, 2016)

Aankhon ke Ishaarein!

अनकही सी कितनी बातें कह जाते है,
महफिलों में प्यार के लफ्ज़ बन जाते है,
बेबसी इन लबों की ये अक्सर मिटा जाते है,
आँखों के इशारे 
जब प्यार की ज़ुबाँ बन जाते है!

जो बयाँ शब्दों से नहीं होता,
जो एहसास बातों में नहीं होता,
अजीब सी कशिश एक दूसरे से मिलने की,
आँखों के इशारे 
पलकों की झपकी में कर जाते है!

यादें, मुलाक़ातें या शोर करते सन्नाटों के दरमियाँ,
दिल के तारों को जोड़ते ये खामोश अफ़साने,
उल्फत की चादर ओढ़े अक्सर क़यामत कर जाते है,
आँखों के इशारे जब 
दो दिलों की एक धड़कन बन जाते है!

~ Sahil
(9th Jan, 2017)

अनकही

कभी-कभी अक्सर एक अजनबी सी खामोशी रह जाती है,
बातें बहुत होती है मगर, वो लबों पर खो जाती है!

कुछ ज़ख्म ऐसे होते है, जो हरे ही रहते है,
वक़्त की चाल जाने अनजाने, ये घांव गहरे कर जाती है!
कभी-कभी बस मुस्कुरा लेना ही लाज़िमी लगता है,
बिन कहे बहुत सी बातें अनजान हो जाती है!
ज़रूरी होता है जीवन में कुछ दर्द छुपा लेना,
रिश्तों के सागर में कुछ कश्तियाँ डूब ही जाती है!

निगाहों का झुक जाना अक्सर शर्म का लिबास नहीं होता,
कोई झाँक ना ले इनकी गहराइयों में,
शायद इसलिए भी ये झुक जाती है!
भीग लेता हूँ बारिश में आजकल,
आँखों की नमी अब इन्हीं के सहारे
छुपते-छुपाते बह जाती है!

ये जान लिया है कि कोई नहीं जाना
शायद इसलिए अब ज़िन्दगी यूँही चलती चली जाती है!
मिल लेता हूं साहिलों से, शामें गुज़ार लेता हूं,
गीली रेत में जो यादों के निशान रख लेता हूं तो,
ये लहरें उन्हें अपने संग ले जाती है!

कभी-कभी अक्सर एक अजनबी सी खामोशी रह जाती है,
बातें बहुत होती है मगर, वो लबों पर खो जाती है!

~ साहिल
(29th January, 2017)