Wajood

तुम चहरे पर उतरती हो आफताब की रोशनी बन कर,
हर सहर मेरी बाहों में अंगड़ाइयाँ भर जाती हो।

तुम फ़िज़ाओं में बहती हो सरगोशी का लिबास ओढ़े,
मेरी साँसों को अपनी महक का घूँट पिला जाती हो।

तुम खेलती रहती हो लहरों की करवटों में उलझकर,
साहिलों पर रेत की नमी बन ज़िन्दगी के अनेक राज़ बहा ले जाती हो।

तुम बैठ जाती हो यादों के गलियारों में हर शाम,
बेवजह इन लबों पर एक रूहानी हँसी छोड़ जाती हो।

तुम रात के आगोश में ओझल हो जाती हो नज़रों की धुंध में सिमट कर,
अप्सरा बन मेरे सपनों में घर कर जाती हो।

तुम जो दिल खोल कर मुस्कुरा लेती हो ज़िन्दगी की बाहों में,
शायद तुम्हें पता नहीं, तुम मुझे जीने का वजूद दे जाती हो।

~ Sahil 💝
(23rd Feb, 2017)

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