Naina

ये नैना, वफ़ा करते है
दिल की गहराइयों के गहरे राज़ बयाँ करते है,
एहसासों की सीलन से उधड़े किनारों पर
ये नैना, इकरार करते है!

जब लफ्ज़ साथ ना दे पाये,
एहसासों से सीने में तड़प उठ आये,
और कुछ यादें उथल-पुथल मचाये,
तब अक्सर ये नैना बातें करते है!

पलकों पर रखकर ज़िन्दगी के लम्हें,
कतरों से सींच कर अनकही हसरतें,
कोई अन्जानी दास्ताँ की लहरों में बह कर
अश्क़ों के किनारों पर ये नैना शाम करते है!

ये नैनों के नीचे की गहरी लकीरों में
अफसानों के कारवां बसते है,
जो बह कर छूट गए थे एक रोज़
अब वहीं बैठे इन नैनों में जान भरते है!

कभी जो जलती लौ की तरह
निहारते थे बिन झपके ये नैना,
आज उड़ती हुई हवाओं में झुका कर नज़रें
ये नैना बहाने हज़ार करते है!

ख़्वाबों की ईटों से
जो उम्मीदों के महल बनाते थे,
आज ढूंढते है कुछ शामियाने
ज़रूरतों की चादर ओढ़े ये नैना शबों को निसार करते है!

टूटते सितारों को देखकर
जो दुआएं माँगते थे ये नैना,
कुछ पुरानी मन्नतों के आसमान में
खुद टूट कर नयी ख्वाहिशों में बँट जाते है!

जिन चेहरों को देखकर मन भर लिया करते
और जिनकी बातों में दिन-रात काट लिया करते,
आज उन्हीं चेहरों से ये नैना नज़रें चुराये
छुपने के ठिकाने ढूंढते रहते है!

जब कोई ना हो पास
रख कर पलकों पर कुछ एहसास,
अक्सर बह कर तन्हाइयों के समंदर में
ये नैना किनारे ढूंढते रहते है!

जिन बाहों में रख कर नमी की परतें
ये नैना कतरों को पनाह देते थे,
अब रो लेते है आँखें मीचे
उन बाहों के आँचल को अब तरसा करते है!

ये नैना, वफ़ा करते है
दिल की गहराइयों के गहरे राज़ बयाँ करते है,
एहसासों की सीलन से उधड़े किनारों पर
ये नैना, इकरार करते है!

~ साहिल
(17th March’ 2017 – Friday)

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