Goonj

अक्सर जहाँ खामोशी रहती है
वहाँ आवाज़ नहीं होती,
किसी के आने-जाने की
किसी के बिखर कर टूट जाने की
कोई नुमाइश नहीं होती!

ना दिन होते है, ना शामें ढलती है
बस रात के अंधियारे में रोशनी पिघलती है,
बैठ जाती है हलके से चौखट पर
तन्हाई चुपके से पहरा देती है,
ना कोई शोर होता है कानों में
ना कोई आह सुनाई देती है,
बस एक गूँज रहती है…
जो सबको अपने आवेश में लेकर
चीखती रहती है,
वजह, तर्क…कुछ नहीं मिलता
उस एक गूंज के सिवाय,
जो जकड़ कर अपनी बाहों में
रूह को मरोड़ती रहती है!

दर्द होता है
पर कोई साथी नहीं होता,
अंदर ही अंदर कुछ चुभता है
मन घुटने लगता है
पर लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं होता!
मरहम में कोई दवा असर नहीं करती
बस सुना है लोगों से
वक़्त ही इन ज़ख्मों को भरता है!

यादों का ये महल
जो अब बंद है चारों तरफ से,
जहाँ बस खामोशी रहती है आजकल
जहाँ कुछ लम्हें यहाँ-वहाँ भटकते रहते है
और कुछ एहसास किसी कोने में दम तोड़ते रहते है,
वहाँ अब बस एक गूँज ही सुनाई देती है…
उन एहसासों से निकलती चीख़ की
उन यादों में रहनुमा एक तस्वीर की
और दिल की दीवारों को चुभती हर धड़कन की,
अब हर दफ़ा ज़हन में बस
खामोशी की एक #Goonj ही रहती है!

~ Sahil
(24th Feb’ 17 – Friday)


Advertisements

Tum aur Mein!

तुम खुशबू बनकर हवाओं में बिखर जाना,
मैं फ़ूल बनकर पत्तों पर जी जाऊँगा!

तुम सपने बनकर मिल लेना अपनी मंज़िल से,
मैं राहें बनकर तुम्हें तुम्हारे ख़्वाबों से मिलाऊँगा!

तुम बारिश में कश्ती बनकर बह जाना सुकून से,
मैं लहरें बनकर तुम्हें तुम्हारे साहिल तक छोड़ आऊंगा!

तुम रोशनी बनकर सभी के जीवन में उजाला भर देना,
मैं सूरज बन लोगों की हर बद-दुआ को अपने साथ ले जाऊंगा!

तुम चाँदनी बन रातों को प्यार से भर देना,
मैं अंधियारा बन हर दर्द छुपा जाऊंगा!

तुम खुशियों की हर चादर अपने माथे पर ओढ़ लेना,
मैं तुम्हारे ग़म को तुमसे बहुत दूर अपने साथ ले जाऊंगा!

तुम हँस लिया करना दिल खोल के,
मैं तुम्हारे कतरें चुरा ले जाऊंगा!

तुम याद ना रखना मुझसे मिली यादों को,
मैं वक़्त आने पर तुम्हें किसी और को सौंप कर चला जाऊंगा!

तुम रहमत बन सजा देना अपनों का जहां प्यार से,
तुम्हारी रहमत के किस्से मैं हर किसी को सुनाता चला जाऊंगा!

तुम ख़्वाब सजाना ज़िन्दगी के आँचल में,
मैं उन ख़्वाबों के मुकम्मल होने की हर रोज़ मन्नत मांगता जाऊंगा!

तुम बसंत ऋतु बनकर दुनिया सजा देना,
मैं पतझड़ बनकर दुनिया के ज़ुल्म सह जाऊंगा!

तुम भूला देना इस शख़्स को कोई अजनबी समझकर,
मैं हमारी अजनबी दास्ताँ को ज़िन्दगी भर पढ़ता चला जाऊँगा!

तुम लफ्ज़ बन सजती रहना मेरी नज़्मों में,
तुम्हें मैं अपनी कविताओं में हासिल कर जाऊँगा!

तुम्हें कोई छीन ना पायेगा मेरी कलम की पकड़ से,
तुम्हारी हर छुअन को मैं अपनी शायरी में सजा जाऊँगा!

तुम वो सब कुछ हो जाना जो दुनिया को बहुत खूबसूरत बनाता है,
मैं हर वो बदसूरत शय बन तुमसे दूर चला जाऊंगा!

तुम खुशबू बनकर हवाओं में बिखर जाना,
मैं फ़ूल बनकर पत्तों पर जी जाऊँगा!

– साहिल

Someone 💕

As I load my bags
To travel a new day,
As the curves appear to set
Hoping for a lovely day,
I take a chance to let the heart skip a beat,
I take a chance to let the life give me reason to breathe!
I know the day is yet to come
I know there is lot more yet to happen,
I’m waiting to give smile a reason
I’m waiting for that one Someone…!

Someone, who brings out the best of life,
Someone, who can put my fears aside,
Someone, who will be the ray of hope in sunset of life,
Someone, whose presence will bring the reason to stand and fight,
Someone, whose touch will be enough for pain to subside,
Someone, with whom life will really find its meaning to define!

As the time takes a tide
Let the waves meet the sides,
Brushing through the dusk and dawn
Let the trance put heart on stride!
With arms wide open and smile so big
I’m waiting for the one Someone…
Someone, who’s made to fill me with life 🙂

– Sahil

और तुम हो!

कुछ पलों के लिये
कुछ सुनाई ना दे,
कुछ पलों के लिए
कुछ याद ना आये।
बस एक अनेरी शान्ति हो,
कुछ एहसास हो,
और तुम हो!


समन्दर से लहरें उठती रहें
मेरे क़दमों से लिपटती रहें,
शाम ढल जाये
और आसमान अपनी चादर ओढ़ ले।
चाँद हो, शबाब हो,
नूर से बिखरते तुम्हारे एहसास हो,
और तुम हो!


लफ्ज़ खामोश रहे
खामोशियाँ बातें करे,
आँखों में आँखें डाले
रात का नशा चढ़ता रहे।
दिल हो, धड़कन हो,
एक ख़्वाब हो,
और तुम हो!


बाहों में तुम पिघलती रहो
हाथों में हाथ हो,
साहिल के दरमियाँ
बस हम और समन्दर पास हो!
एक ख़्वाब हो,
ज़िन्दगी बस एक रात हो,
और तुम हो!


~ साहिल