Aaj Kuch Naya Karte Hai

बरसों से उसूलों के दायरे में जीते आ रहे है
ऐ ज़िन्दगी…चल आज कुछ नया करते है!

उन दायरों से कुछ देर बाहर निकलते है
जो कभी करने का साहस ना किया, 
वो आज करते है।
ये आँखें भी थक चुकी है अब
उन ख़यालों की दीवारों के पीछे रहकर,
लाँघ कर दीवारों को एक नया कदम
उस दुनिया में भी रखते है।
कुछ देर के लिये ही सही
उसूलों के शहर से बाहर निकलते है,
ऐ ज़िन्दगी…चल आज कुछ नया करते है!

कुछ बेबुनियाद ख्वाहिशें और बेतुके सपने
जो बचपन में देखे थे कभी
वो सपने आज फिर से देखते है।
जो मटरगश्ती होती थी जिगरी यारों संग
वही बद्तमीज़ी आज फिर से करते है,
ऐ ज़िन्दगी…चल आज कुछ नया करते है!

वक़्त ने दिल में जो डर का बीज बोया है,
इससे पहले की वो दिल को जकड ले
उसे जड़ से निकाल बाहर फेंकते है
हर ख़ुशी, हर ग़म का एहसास करते है।
उन पुराने उसूलों में कुछ नये पैमाने जोड़ते है,
ऐ ज़िन्दगी…चल आज कुछ नया करते है!

बरसों से उसूलों के दायरे में जीते आ रहे है
चल आज कुछ नया करते है!

~साहिल

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