Alvida 2016! Welcome 2017!

भूले बिसरे वादों में
कुछ यादें छोड़ आया है,
२०१६ का साल अलविदा कहने आया है!

वक़्त की गति भी बढ़ने लगी है शायद
जैसे जैसे ज़िन्दगी बढ़ती चली जा रही है,
कुछ खुशियों को यादों में
और कुछ ख़्वाबों को सलाखों में धकेलती जा रही है।
बचपन में एहसास होता था
हर एक पल हर एक लम्हे का,
अब तो लगता है
जैसे ज़िन्दगी बेधड़क दौड़े चली जा रही है।
वक़्त की इस रेल में
अब नया स्टेशन आने वाला है,
कुछ पुराने अरमान, कुछ पुरानी हसरतों और कुछ मुसाफिरों को
नये इरादों में बदलने वाला है,
अपना शामियाना समेटकर
२०१६ का साल अलविदा कहने आया है!

खुशियों से ये जहान सजाया
हर ग़म में तूने दोस्ती का साथ निभाया,
राहों को मंज़िलों का जरिया दिखलाया
कुछ अजनबी इरादों को नया नज़रिया दिखाया,
प्यार का बीज बो कर तूने
हर अँधेरे को उज्जवल होना सिखाया।
एक कहानी…जो चली थी
कुछ सपने, कुछ अपने और कुछ अफ़साने लेकर
उस कहानी का अब अंतिम पड़ाव आया है,
सफहा पलट कर, कलम कोरे पन्ने पर रख कर
२०१६ का साल अलविदा कहने आया है!

जो ना मिला उसका ग़म नहीं
जो मिला तुझसे उसका शुक्रिया,
जो छूट गया सफर में वो शायद फिर से मिलेगा तो नहीं
मगर उनसे मिले सारे तजुर्बों का शुक्रिया।
हँसते-खेलते बीत गया तेरे संग ये सफर
अब जाते-जाते कहीं रुला ना दे विदाई के ये क्षण,
समेट रहा है झोली में कुछ यादें, कुछ फ़साने
सौंप कर किसी और के हाथों जाने कहाँ चला २०१६ फ़ौरन!

शुक्रिया २०१६ 
तुम अक्सर याद आओगे,
इन यादों से तुमने रिश्ते बनाये है।
वेलकम २०१७
तुम्हारे संग एक नया सवेरा आया है।
२०१६ का साल अलविदा कहने आया है,
नयी उम्मीदें, नयी उमंग, २०१७ अपने साथ लाया है!

भूले बिसरे वादों में
कुछ यादें छोड़ आया है,
२०१६ का साल अलविदा कहने आया है,
कुछ नयी उम्मीदें, कुछ नयी ख़्वाहिशें लेकर आया है, 
२०१७ ज़िन्दगी बेहतर बनाने आया है!

Happy New Year 🙂
May this new year bring lots of happiness and hopes!

– Sahil

फिर भी तेरी याद आती है!

हर कोशिश की तुझे भुलाने की
हर साज़िश की तेरी यादें मिटाने की,
तेरे लिखे हुए खत
और तेरी उन तमाम खूबसूरत तस्वीरों को,
जुर्रत भी की मैने जलाने की,
फिर भी तेरी याद आती है!

ये भीनी-भीनी रेत तेरे होठों की नमी सी लगती है,
बारिश की बूँदें तेरी सरगमी बातों की महक दे जाती है।
कम्बख्त ये हवायें भी मदहोशी के गीत गाती है आजकल
बदन को छूते ही तेरी साँसों की सरगोशी दे जाती है।
बहुत कोशिश की तेरे आँचल से दूर जाने की
फिर भी तेरी याद आती है!
मेरे हर मौसम को तेरी आदत जो हो गई है!

ज़िन्दगी में अब एक कमी सी रहती है
हर ख़ुशी में एक खालिश सी रहती है,
इन आँखों पर अब परदा डाले फिरता हूं मैं
डरता हूँ कही झाँक ना ले कोई इन नैनों में,
बहुत कोशिश की तुझसे नज़रें चुराने की
फिर भी तेरी याद आती है!
इन आँखों को तेरे आवेश की आदत जो हो गई है!

बहुत कोशिश की तेरे बारे में ना लिखूं,
तेरा ज़िक्र नहीं करू,
पर शायद मेरे शब्दों के इस खेल का
तेरे मामूल से रिश्ता सा हो गया है!
हर कोशिश की तुझे भुलाने की
हर साज़िश की तेरी यादें मिटाने की,
फिर भी तेरी याद आती है!
मेरी पलकों पर तेरी यादें जो रहती है!

– साहिल

Aaj Kuch Naya Karte Hai

बरसों से उसूलों के दायरे में जीते आ रहे है
ऐ ज़िन्दगी…चल आज कुछ नया करते है!

उन दायरों से कुछ देर बाहर निकलते है
जो कभी करने का साहस ना किया, 
वो आज करते है।
ये आँखें भी थक चुकी है अब
उन ख़यालों की दीवारों के पीछे रहकर,
लाँघ कर दीवारों को एक नया कदम
उस दुनिया में भी रखते है।
कुछ देर के लिये ही सही
उसूलों के शहर से बाहर निकलते है,
ऐ ज़िन्दगी…चल आज कुछ नया करते है!

कुछ बेबुनियाद ख्वाहिशें और बेतुके सपने
जो बचपन में देखे थे कभी
वो सपने आज फिर से देखते है।
जो मटरगश्ती होती थी जिगरी यारों संग
वही बद्तमीज़ी आज फिर से करते है,
ऐ ज़िन्दगी…चल आज कुछ नया करते है!

वक़्त ने दिल में जो डर का बीज बोया है,
इससे पहले की वो दिल को जकड ले
उसे जड़ से निकाल बाहर फेंकते है
हर ख़ुशी, हर ग़म का एहसास करते है।
उन पुराने उसूलों में कुछ नये पैमाने जोड़ते है,
ऐ ज़िन्दगी…चल आज कुछ नया करते है!

बरसों से उसूलों के दायरे में जीते आ रहे है
चल आज कुछ नया करते है!

~साहिल

Ye kya hai jo guzar raha hai?

Kuch hai jo beh raha hai,
Haule-haule, chup-chaap guzar raha hai!
Din dhalta hai, raat hoti hai
Shaamein bhi albata dum tod deti hai,
Raat ke baad fir savera hota hai
Aur fir wohi baat hoti hai!
Me khayaalon me dooba
Aksar ye sochta rehta hu,
Aakhir ye kya hai jo guzar raha hai???

Kya ye mera vaham hai
Jo idhar-udhar bhatak raha hai,
Ya ye suraj aur chaand ka aham hai
Jo nishaaon ko khatak raha hai!
Koi kehta hai ye ek khel hai
Zindagi se maut tak ka,
Toh koi kehta hai ye ek dariya hai
Gehri si gehraaiyon me dooba,
Me uljhi paheliyaan bujh raha hu
Dhundh raha hu,
Aakhir ye kya hai jo guzar raha hai???

Shayad waqt ki ret
Meri yaadon ki baarish me
Sakht hogai hai,
Mere kadam
Bheegi ret me dhans gae hai,
Aur wo retghadi ki ret ab
Ultaane par bhi nahi girti!
Me wahi waqt ki ret me atka,
Khwaabon ki baarish me bheega,
Khoj raha hu
Aakhir ye kya hai jo guzar raha hai???

Din dhalta hai, raat hoti hai
Shaamein bhi albata dum tod deti hai,
Raat ke baad fir savera hota hai
Aur fir wohi baat hoti hai!
Me khayaalon me dooba
Ab ye soch raha hu,
Aakhir ye kya hai jo guzar raha hai
Haule-haule chup-chaap!!!

~Sahil

तू ही जीवन, तू ही सर्वनाश है!

तू उठ, तू चल, 
तू किसलिये निराश है,
तू सती नहीं, तू आग है,
तू ही जीवन, तू ही सर्वनाश है!

तू रुक नहीं, तू डर नहीं,
तू सिमट ना जा यूँ यहीं,
ये वक़्त का सैलाब है
हौसले से टूट जायेगा,
तेरे इरादों में भी जब,
क्रोध बहता जायेगा
क्रोध बहता जायेगा!

ये बेड़ियाँ समाज की
तुझे तोड़ने का शस्त्र है,
सहनशीलता की मिसाल तू
तू पापियों का काल है,
तू लड़, तेरा हक़ तुझे
एक दिन हासिल हो जायेगा
एक दिन हासिल हो जायेगा!

तू उठ, तू चल, 
तू किसलिये निराश है,
तू सती नहीं, तू आग है,
तू ही जीवन, तू ही सर्वनाश है!

वाकिफ नहीं ये जहाँ तुझसे,
तेरे भीतर जो आघात है,
कमज़ोर समझ ना तू खुद को,
तुझमे दुर्गा का आवास है,
दिखा दे इस जहाँ को
तुझमे भी वो मशाल है
तुझमेे भी वो मशाल है!

गलत नहीं है तू जहा
तो क्यों वहाँ त्रस्त है,
तेरी पलकों पर अश्क़ क्यों,
क्यों तुझे दर्द है,
तू इस कदर कदम बढ़ा,
कि गुनाह भी कतरायेगा,
कि गुनाह भी कतरायेगा!

सच की राह पर तू चल,
वक़्त भी इक रोज़ तेरी राह अपनायेगा,
तेरा हौसला, तेरी काबिलियत,
एक प्रेरणा बन दिखलायेग…
कि तेरी बनाई राह पर
ये डर भी कप-कपायेगा
ये डर भी कप-कपायेगा!

तू उठ, तू चल, 
तू किसलिये निराश है,
तू सती नहीं, तू आग है,
तू ही जीवन, तू ही सर्वनाश है!

– साहिल