मेरे जाने से पहले

मेरे जाने से पहले
तुम ना ही मिलते
तो बेहतर होता!

ना तुम रोते, ना मैं रोता,
इन हवाओं में ग़म का मौसम ना होता,
इन होठों को एहसास भी ना होता
मेरी जलती लाल आँखों का,
जो तुम भी अपनी आँखों पर 
परदा डाल लेते
तो बहतर होता!
मेरे जाने से पहले
तुम ना ही मिलते
तो बेहतर होता!

ज़रा सा अकेलापन किसी से उधार लेकर
मैं निकल पड़ता एक नये सफर पर,
वो भारी भरकम यादों का डिब्बा
जो संभाल कर रखा था अपने बैग में,
उसमे से रोज़ एक निवाला खा कर
मैं मन भर लेता!
मेरे जाने से पहले
तुम ना ही मिलते
तो बेहतर होता!

भरी महफ़िल में तुमसे 
अजनबी की तरह पेश ना होना पड़ता,
जाते-जाते तुम्हारी पलकों पर
कोई आंसू ना सिसकता,
अगर नज़रों से नज़रें ना ही मिलती
तो बेहतर होता!
मेरे जाने से पहले
तुम ना ही मिलते
तो बेहतर होता!

वो झूठी हँसी भी तुम्हारे चेहरे पर
खूब चमकती थी,
काश…ऐसा हुनर मैं भी
तुमसे सीख लेता!
हाथ मिलाकर सबसे
मैं चला जाता ख़ुशी-ख़ुशी,
जो तुम गले ना ही लगते
तो बेहतर होता!
मेरे जाने से पहले
तुम ना ही मिलते
तो बेहतर होता!

जो तुम भी अपनी आँखों पर 
परदा डाल लेते
तो बहतर होता!
उन यादों का डिब्बा
जो ना ही खुलता
तो बेहतर होता!
मेरे जाने से पहले
तुम ना ही मिलते
तो बेहतर होता!

~साहिल

Advertisements

2 thoughts on “मेरे जाने से पहले

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s