लम्हे-ख़ुशी का खेल

आसमान की छत पर लगा
तारों का मेला था,
दिल की ज़मीन पर
कहीं कोइ लम्हा अकेला था।

तलाश में रोशनी की
वो बहता चला जा रहा था,
ज़िन्दगी की दौड़ में
वो घुटता जा रहा था।

कतरा-कतरा अपने ही साये में
जिये जा रहा था,
वक़्त के काले बादलों के बीच
वो तड़पता जा रहा था!

शायद किसी की तलाश थी उसे,
आँखों में किसी की
प्यास थी उसके।

बंजर इस दिल की ज़मीन पर
गुलशन-ए-बहार की
ख्वाहिश थी उसे।

भटके राही की तरह
दरबदर ठोकरे खाता,
किसी एक अंजुमन की
गुंजाइश थी उसे!

जब हाथ ख़ुशी ने
उस लम्हे का थामा,
तो जैसे यारी का
पैगाम लिख दिया।

रोशन जब सवेरे से
वो लम्हा हुआ,
मंज़िल की राह
आसान कर गया।

एक दूसरे के बिना
दोनों अधूरे है,
ये दुनिया को
स्पष्ट कर दिया।

ज़िन्दगी के इस
लम्हे-ख़ुशी के खेल ने,
दोस्ती का एक
नया सार लिख दिया!

~~साहिल

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Zindagi kahaan ruki hai!

Kabhi dekha hai suraj andhere me???
Ya kabhi dekhi hai raat bin taaron ke???
Samandar se nikaal lo
Chaahe kitna bhi pani,
Fir bhi kahaan use pani ki kami hai!
Ye zindagi hai dost,
Har haal me chalti rehti hai…
Ye kahaan kabhi ruki hai!!!

Badalte mausam ke tevar ki tarah
Zindagi bhi naya raag alaapti hai,
Hum musaafiron ka maseeha ban
Kabhi sukh le aati hai
Kabhi dukh de jati hai!
Koi aata hai koi jata hai
Par iss duniya me kaha
Koi fark aata hai!
Ye zindagi hai dost…
Har pal chalti rehti hai,
Behte pani ki tarah…
Ye kahaan kabhi ruki hai!!!

Ped se kaat lo agar ek daali
Toh kahaan kuch fark padta hai,
Rota hoga bhi agar ped andar hi andar
Fir bhi woh badhta chala jata hai!
Yahi ek usool hai zindagi ka,
Chalte rehna hi dastoor hai zindagi ka,
Yaadon se sajaate chalo apni duniya…
Kyunki yaadon se hi fitoor hai zindagi ka!
Yunhi chalti rahegi zindagi…
Ye kahaan kabhi ruki hai!!!
Samandar ke kinaaro par
Kya kabhi ret ki nami thami hai???

–Sahil

सीख़

एक ख्वाब हो तुम इस दुनिया के,
ज़रा ऊँचा उड़ना सीखो।
टूट ना जाना मुश्किलों में,
ज़रा सम्भलना सीखो।
कभी सोचा है…
क्या फर्क पड़ता है दुनिया को तुम्हारे ना होने से ???
दुनिया में कुछ फर्क बनाना सीखो।।।

उम्मीद बन जाना आसान हैं,
उम्मीदों पर खरा उतरना सीखो।
नदियों को भी नया अस्तित्व मिलता है सागर में,
सागर की तरह जिगर रखना सीखो।
तुम तुम हो, वो वो है,
तुम वो नहीं, तुम तुम बनना सीखो।।।

खुल गई उम्र की सलाखें,
मिल गई तुम्हे आज़ादी,
आज़ाद पंछी की तरह,
तुम जश्न मनाना सीखो।
मुस्कराहट
इंसान का सबसे खूबसूरत गहना है,
उसे पहनना,
और पहनाना तुम सीखो।।।

जीत हार तो सिर्फ एक खेल है,
इसे खेल की तरह खेलना सीखो।
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती,
तुम कोशिश तो करना सीखो !
ये ज़िन्दगी से मौत तक का,
जो छोटा सा फासला है
इस फासले के दरमियाँ,
जीने और जीने देना सीखो।।।

एक ख्वाब हो तुम इस दुनिया के,
ज़रा ऊँचा उड़ना सीखो।
टूट ना जाना मुश्किलों में,
ज़रा सम्भलना सीखो।।।

~साहिल


Kalam, Kaagaz aur Mein!

Aaj kuch alag sa ehsaas hua
Jab mene apni kalam uthai,
Kaagaz ke shwet rang ne
Aaj kuch alag si baat bataai!
Yun toh roz iss kalam aur kaagaz ki
Jugalbandi sajti hai,
Hazaaron khwaab aur laakhon alfaaz
Apne ishaaron par rachti hai
Par na jaane kyu…
Aaj iss kaagaz ko,
Meri ye kalam
Kuch zyaada hi raas aai!!!

Kehne ko toh bada saral hai
Ye kaagaz, kalam aur lafzon ka khel,
Choti si umar me thama dete hai
Inhe haathon me,
Kehte hai bana lo apni zindagi
Iss khel ko baar baar khel!
Par jinhe andaaza hai
Shabdon ki taaqat ka,
Unhe pata hai ki
Nahi hai ye koi baccho ka khel
Arsa beet jata hai
Inme maharath haasil karne me,
Aur jo karle
Wo kara dete hai bhaavnaao ka…
Lafzon se mel!!!

Mere shabd agar teer hai
Toh kalam uska dhanush
Aur kaagaz uski tarkash,
Nikle jo teer tarkash se
Dhanush se hi mile use maqsad!
Adhoore hai shabd kaagaz ke bina
Aur kora hai kaagaz kalam ke bina,
In teeno me hi rukhsat
Meri zindagi ka saar
Aur yaadon ka gavaah!
Yunhi kaid hote rahe
Ye din in panno me,
Aur yunhi chalti rahe ye kalam
Jabtak ye haath na ho kafan me!
Waqt ki unchi meenaaron ke peeche
Kahi kho na jana,
Kalam aur kaagaz —
Bas meri parchhai ki tarah tum
Mere saath chalte chale jana!!!

Aaj kuch alag sa ehsaas hua
Jab mene apni kalam uthai,
Kaagaz ke shwet rang ne
Aaj kuch alag si baat bataai!!!

~Sahil

जीवन जीना सीखा दिया!

नन्हें से हाथों को थामकर
आपने पहला कदम चलना सीखा दिया,
जब बोलने लगी थी वो कच्ची ज़ुबान
आपने “माँ” बोलना सीखा दिया!
माता, पिता, दोस्त का रूप लेकर
मुझे बेहतर इन्सान बना दिया,
शुक्रगुज़ार रहेगा हमेशा ये दिल आपका
मुझे जीवन जीना सीखा दिया!!!

बचपन की उन मासूम आँखों को
आपने ख़्वाब देखना सीखा दिया,
चंचल मन और कच्ची सोच में आपने
सच्चाई का अटूट धागा पिरो दिया!
सपनों को उड़ान देकर
आपने ज़िन्दगी में उमंग भरना सीखा दिया,
ना जाने कितनी कच्ची कलियों को पौधा बनाकर
आपने जीवन जीना सीखा दिया!!!

सही-गलत का पाठ पढ़ाकर
आपने राहें परखना सीखा दिया,
मानव जीवन का सार बतलाकर
आपने इंसानियत निभाना सीखा दिया!
कभी शिक्षक, तो कभी दोस्त बनकर
गलत रास्तों से मुझे बचा लिया,
ज़रूरत पड़ने पर नीचे गिराकर
और ज़रूरत पड़ने पर मुझे पलकों पर बैठाकर
मुझे जीवन जीना सीखा दिया!!!

भूगोल, गणित, विज्ञान, इतिहास, आदि से
दुनिया भर का ज्ञान सीखा दिया,
सरलता, शीतलता और संस्कारों से
ज़िन्दगी में खुश रहना और रखना सीखा दिया!
निपुणता और मेहनत का महत्व बताकर
आपने रोटी कमाना सीखा दिया,
इज़्ज़त करना और कमाने का हुनर सिखाकर
आपने जीवन जीना सीखा दिया!!!

शिक्षक का जीवन और समाज में अमूल्य योगदान है
उन्होंने अनेक जीवनों को सार्थक बना दिया,
अलग-अलग समय में, अलग-अलग रूप में
हमेशा कुछ नया और बेहतर सीखा दिया!
शत-शत नमन है उन गुरुओं को
जिन्होंने मुझे आज इस काबिल बना दिया,
दुनिया की बुराइयों को अच्छाई से लड़ना सिखाकर
मुझे जीवन जीना सीख दिया!!!

खुशकिस्मत हूं मैं जो मुझे आपका साथ मिला
आपके साथ ने मुझे कुछ नया सीखा दिया,
शुभकामनायें आप सबको इस पावन दिवस पर
आपने “शिक्षक” शब्द का गौरव बढा दिया!
माता, पिता, दोस्त का रूप लेकर
मुझे बेहतर इन्सान बना दिया,
शुक्रगुज़ार रहेगा हमेशा ये दिल आपका
मुझे जीवन जीना सीखा दिया!!!

Happy Teacher’s Day 🙂

-Sahil

एक पहल की तो बात है

ख़्वाबों के मुसाफिर अक्सर दौड लगाते हैं,

कभी इधर भागते है

तो कभी उधर भागते है

और फिर राहें भटक जाते है।

उन ख़्वाबों को पूरा करने के लिए,

उन भटके मुसाफिरों को

मंज़िल से मिलाने के लिए

बस एक पहल की तो बात है!!!


एक पहल जो अँधेरे में 

चिंगारी का काम करती है,

एक पहल जो निराशा में

आशा की ज्योति जलाती है,

वो एक पहल ही है

जो ख्वाहिशों के बिखरे टुकड़े

समेट लेती है।

जब एक छोटा बच्चा 

चलना सीखता है,

वो गिरता है, रोता है

मगर कोशिश कायम रखता है,

देखते-ही-देखते एक दिन

वो दौड़ने लगता है।

ख़्वाबों को दौड़ाने के लिए

उस एक पहल की तो बात है!!!


बेशक काँटे कई मिलेंगे राहों में,

पर वो हमें सोचने की

शक्ति दे जाती है,

हज़ारों सवाल रहते है ज़हन में,

वो उन सवालों को एक कड़ी में जोड़

जवाबों की राह दिखा जाती है।

ये पहल उस गुड़िया के

खिलौने की तरह होती है,

चाबी घुमाते ही नन्ही सी जान

मुस्कुराने लगती है।

ज़िन्दगी में कुछ हासिल करने को

बस एक पहल की तो बात है!!!

~~साहिल